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स्लग हजारों होल्यारों ने बाबा बागनाथ धाम में होली का किया सामूहिक गायन

लोकेशन_ बागेश्वर

रिपोर्टर _ मनोज कुमार

एंकर_

बागेश्वर कुमाऊं की काशी के नाम से विश्व विख्यात शिव की नगरी बागेश्वर मुख्यालय में होलियों की टोलिया भी होली की मस्ती में डूब गयी। होलियों की खुमारी अब शहर से लेकर गाउँ तक अपने पूरे शबाब पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर तक, पुरुष महिला, बच्चे, बुजुर्ग सभी होली के रंग में सराबोर हैं। जब हर तरफ रंग हो और बाबा बागनाथ जी होली न खेलें ऐसा कैसे हो सकता है।
बागेश्वर में रंग पड़ने एकादशी से छरड़ी तक होली मनाई जाती है। चतुर्दशी के दिन जनपद के दर्जनों गांवों से बाबा बागनाथ के मंदिर में होली गायन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इलाके के गांवों से होल्यार अपने अपने दलनायक अथवा डांगर के नेतृत्व मे आते हैं। सभी गांवों के होल्यारों का मिलन चौक बाजार में होता है जहां से सभी होल्यार एकरुप होकर बागनाथ मंदिर में एकत्र हो शिवजी को अबीर, गुलाल, तथा रंगों से पूजा अर्चना कर शिवजी के होली गायन के जरिये होली मनाने का निमंत्रण देते हैं। मंदिर परिसर में होली गायन के बाद शिवजी को अगली होली में फिर आने की प्रार्थना के साथ विदा किया जाता है। एक ओर जहां यह परंपरा काफी पुरानी और समृद्ध है वहीं अब युवा वर्ग का परंपराओं की ओर घटते रुझान का असर होलियों पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ वर्षों पहले तक जहां बाजारों में चतुर्दशी के दिन होल्यारों का मेला लग जाता था मगर अब लोग रस्म अदायगी भर के लिए आ रहे है। चतुर्दशी के दिन दूरदराज के ग्रामीणों में मिठाइयों और गुझियों की काफी मांग रहती है।

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